श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 230
 
 
श्लोक  3.2.230 
এই মত অচিন্ত্য অগম্য লীলা-মাত্র
তান অনুগ্রহে বুঝে তান কৃপা-পাত্র
एइ मत अचिन्त्य अगम्य लीला-मात्र
तान अनुग्रहे बुझे तान कृपा-पात्र
 
 
अनुवाद
ऐसी लीलाएँ अकल्पनीय और अथाह हैं। केवल भगवान की कृपा प्राप्त व्यक्ति ही इन्हें समझ सकता है।
 
Such pastimes are unimaginable and unfathomable. Only one blessed by the Lord can understand them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)