vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,
»
श्लोक 230
श्लोक
3.2.230
এই মত অচিন্ত্য অগম্য লীলা-মাত্র
তান অনুগ্রহে বুঝে তান কৃপা-পাত্র
एइ मत अचिन्त्य अगम्य लीला-मात्र
तान अनुग्रहे बुझे तान कृपा-पात्र
अनुवाद
ऐसी लीलाएँ अकल्पनीय और अथाह हैं। केवल भगवान की कृपा प्राप्त व्यक्ति ही इन्हें समझ सकता है।
Such pastimes are unimaginable and unfathomable. Only one blessed by the Lord can understand them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×