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श्लोक 3.2.229  |
প্রাণ-সম অধিক যে সব ভক্ত-গণ
তাহারে ও দেখি যেন নিরপেক্ষ মন |
प्राण-सम अधिक ये सब भक्त-गण
ताहारे ओ देखि येन निरपेक्ष मन |
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| अनुवाद |
| फिर भी वह उन भक्तों की उपेक्षा कर सकता है जिन्हें वह अपने जीवन के बराबर या उससे भी बड़ा समझता है। |
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| Yet he can ignore devotees whom he considers equal to or even greater than his life. |
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