श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 228
 
 
श्लोक  3.2.228 
মারিবেন হেন যারে আছযে অন্তরে
তাহারে ও দেখি যেন মহা-প্রীতি করে
मारिबेन हेन यारे आछये अन्तरे
ताहारे ओ देखि येन महा-प्रीति करे
 
 
अनुवाद
वह उस व्यक्ति के प्रति भी बहुत स्नेह दिखा सकता है जिसे वह मारना चाहता है।
 
He can also show great affection towards the person he wants to kill.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)