श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 214
 
 
श्लोक  3.2.214 
সকল বুঝায ছলে শ্রী-গৌরসুন্দরে
যে জানযে মর্ম, সেই জন সুখে তরে
सकल बुझाय छले श्री-गौरसुन्दरे
ये जानये मर्म, सेइ जन सुखे तरे
 
 
अनुवाद
श्री गौरसुन्दर ने इसी बहाने सबको शिक्षा दी। जो इस सत्य को समझ लेता है, उसका उद्धार सहज ही हो जाता है।
 
Shri Gauranga Sundara taught everyone this very lesson. One who understands this truth is easily liberated.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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