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श्लोक 3.2.198  |
ক্ষণে বা যে আছাড খাযেন প্রেম-রসে
চূর্ণ হয অঙ্গ হেন সর্ব-লোকে বাসে |
क्षणे वा ये आछाड खायेन प्रेम-रसे
चूर्ण हय अङ्ग हेन सर्व-लोके वासे |
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| अनुवाद |
| कभी-कभी प्रेमोन्मत्त होकर वे इतनी जोर से जमीन पर गिर पड़ते कि सभी को लगता कि उनके अंग टूट गये हैं। |
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| Sometimes, in a fit of love, he would fall to the ground with such force that everyone would think his limbs were broken. |
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