| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 3: अंत्य-खण्ड » अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन, » श्लोक 196 |
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| | | | श्लोक 3.2.196  | কখন হুঙ্কার করে, কখন রোদন
ক্ষণে মহা অট্ট-হাস্য, ক্ষণে বা গর্জন | कखन हुङ्कार करे, कखन रोदन
क्षणे महा अट्ट-हास्य, क्षणे वा गर्जन | | | | | | अनुवाद | | कभी वह जोर से दहाड़ता, कभी रोता, कभी जोर से हंसता, कभी गरजता। | | | | Sometimes he would roar loudly, sometimes he would cry, sometimes he would laugh loudly, sometimes he would thunder. | | ✨ ai-generated | | |
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