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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,
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श्लोक 194
श्लोक
3.2.194
কত-দূরে গৌরচন্দ্র বসিলেন গিযা
নিত্যানন্দ-স্বরূপের অপেক্ষা করিযা
कत-दूरे गौरचन्द्र वसिलेन गिया
नित्यानन्द-स्वरूपेर अपेक्षा करिया
अनुवाद
गौरचन्द्र कुछ दूर आगे चले गए और फिर नित्यानंद स्वरूप की प्रतीक्षा करने बैठ गए।
Gaurachandra went a little further and then sat down to wait for Nityananda Swarup.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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