श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 193
 
 
श्लोक  3.2.193 
রহিলা অনেক পাছে নিত্যানন্দ-চন্দ্র
সṁহতি তাঙ্হার সবে শ্রী-জগদানন্দ
रहिला अनेक पाछे नित्यानन्द-चन्द्र
सꣳहति ताङ्हार सबे श्री-जगदानन्द
 
 
अनुवाद
श्री जगदानन्द के साथ नित्यानंद बहुत पीछे रह गये।
 
Nityananda was left far behind with Sri Jagadananda.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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