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श्लोक 3.2.189  |
নিজ প্রেমানন্দে প্রভু পথ নাহি জানে
অহর্-নিশ সুবিহ্বল প্রেম-রস-পানে |
निज प्रेमानन्दे प्रभु पथ नाहि जाने
अहर्-निश सुविह्वल प्रेम-रस-पाने |
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| अनुवाद |
| अपने आनंदमय प्रेम में डूबे प्रभु को समझ नहीं आ रहा था कि किस ओर जाएँ। दिन-रात वे आनंदमय प्रेम के रस में डूबे रहते थे। |
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| Immersed in His blissful love, the Lord did not know which way to turn. Day and night He remained immersed in the blissful love. |
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