श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 187
 
 
श्लोक  3.2.187 
অসুর দ্রবিল চৈতন্যের গুণ-নামে
অত্যন্ত দুষ্কৃতি পাপী সে-ই নাহি মানে
असुर द्रविल चैतन्येर गुण-नामे
अत्यन्त दुष्कृति पापी से-इ नाहि माने
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य के गुणों और नामों को सुनकर राक्षस भी परिवर्तित हो गए। केवल सबसे पापी दुष्ट ही उन्हें स्वीकार नहीं करते।
 
Even the demons were transformed upon hearing the qualities and names of Lord Caitanya. Only the most sinful of evildoers do not accept Him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)