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श्लोक 3.2.180  |
সবেই উঙ্হার ভৃত্য আমরা সকল”
কহিতে সবার আঙ্খি বাহিঽ পডে জল |
सबेइ उङ्हार भृत्य आमरा सकल”
कहिते सबार आङ्खि वाहिऽ पडे जल |
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| अनुवाद |
| “हम सब उसके सेवक हैं।” ये शब्द बोलते हुए उनकी आँखों से आँसू बहने लगे। |
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| “We are all his servants.” Tears welled up in his eyes as he spoke these words. |
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