श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  3.2.165 
দেখিযা প্রভুর তেজ পাইল বিস্ময
জিজ্ঞাসিল,—“তোমার কতেক-লোক হয?”
देखिया प्रभुर तेज पाइल विस्मय
जिज्ञासिल,—“तोमार कतेक-लोक हय?”
 
 
अनुवाद
भगवान का तेज देखकर आश्चर्यचकित होकर उन्होंने पूछा, "आपके साथ कितने लोग हैं?"
 
Surprised by the Lord's brilliance, he asked, "How many people are with you?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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