श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  3.2.160 
ভিক্ষা করিঽ প্রভু হৈঽ হরষিত মন
আইলেন যথা বসিঽ আছে ভক্ত-গণ
भिक्षा करिऽ प्रभु हैऽ हरषित मन
आइलेन यथा वसिऽ आछे भक्त-गण
 
 
अनुवाद
भिक्षा मांगने के बाद भगवान प्रसन्न हो गए और फिर वहीं लौट गए जहाँ भक्त प्रतीक्षा कर रहे थे।
 
After receiving the alms, the Lord became pleased and returned to where the devotees were waiting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)