श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  3.2.130 
হেনৈ সমযে কহে রামচন্দ্র খাঙ্ন
“নৌকা আসিঽ ঘাটে প্রভু, হৈল বিদ্যমান”
हेनै समये कहे रामचन्द्र खाङ्न
“नौका आसिऽ घाटे प्रभु, हैल विद्यमान”
 
 
अनुवाद
उस समय रामचन्द्र खाँ आये और बोले, “हे प्रभु, नाव घाट पर आ गयी है।”
 
At that time Ramchandra Khan came and said, “O Lord, the boat has reached the ghat.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)