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श्लोक 3.2.120  |
কিছু-মাত্র অন্ন প্রভু পরিগ্রহ করিঽ
উঠিলেন হুঙ্কার করিযা গৌরহরি |
किछु-मात्र अन्न प्रभु परिग्रह करिऽ
उठिलेन हुङ्कार करिया गौरहरि |
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| अनुवाद |
| चावल का एक निवाला खाकर गौरहरि खड़ी हो गई और जोर से दहाड़ने लगी। |
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| After eating a morsel of rice, Gaurhari stood up and started roaring loudly. |
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