श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  3.2.118 
যদি কৃপা-দৃষ্টি না করেন জীব-প্রতি
তবে কার আছে তানে জানিতে শকতি
यदि कृपा-दृष्टि ना करेन जीव-प्रति
तबे कार आछे ताने जानिते शकति
 
 
अनुवाद
यदि भगवान जीवों पर दया दृष्टि न डालें, तो उन्हें जानने की शक्ति किसमें होगी?
 
If God does not look with mercy upon the living beings, who will have the power to know Him?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)