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श्लोक 3.2.1  |
জয জয গৌরচন্দ্র জয সর্ব-প্রাণ
জয দুষ্ট-ভযঙ্কর জয শিষ্ট-ত্রাণ |
जय जय गौरचन्द्र जय सर्व-प्राण
जय दुष्ट-भयङ्कर जय शिष्ट-त्राण |
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| अनुवाद |
| गौरचन्द्र की जय हो! सभी के जीवन और आत्मा की जय हो! दुष्टों के भय के साक्षात् स्वरूप आपकी जय हो! भक्तों के उद्धारक की जय हो! |
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| Hail Gaurachandra! Hail the life and soul of all! Hail the embodiment of fear for the wicked! Hail the savior of the devotees! |
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