श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.2.1 
জয জয গৌরচন্দ্র জয সর্ব-প্রাণ
জয দুষ্ট-ভযঙ্কর জয শিষ্ট-ত্রাণ
जय जय गौरचन्द्र जय सर्व-प्राण
जय दुष्ट-भयङ्कर जय शिष्ट-त्राण
 
 
अनुवाद
गौरचन्द्र की जय हो! सभी के जीवन और आत्मा की जय हो! दुष्टों के भय के साक्षात् स्वरूप आपकी जय हो! भक्तों के उद्धारक की जय हो!
 
Hail Gaurachandra! Hail the life and soul of all! Hail the embodiment of fear for the wicked! Hail the savior of the devotees!
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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