श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  3.10.80 
আর কি কহিব প্রেমনিধির মহিমাযাঙ্
র শিষ্য গদাধর এই প্রেম-সীমা
आर कि कहिब प्रेमनिधिर महिमायाङ्
र शिष्य गदाधर एइ प्रेम-सीमा
 
 
अनुवाद
प्रेमनिधि की महिमा के बारे में मैं और क्या कहूँ? उनके प्रेम की सीमा इसी बात से समझ में आती है कि उनके गदाधर पंडित जैसे शिष्य थे।
 
What more can I say about the greatness of Premanidhi? The extent of his love is evident from the fact that he had a disciple like Gadadhara Pandit.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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