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श्लोक 3.10.80  |
আর কি কহিব প্রেমনিধির মহিমাযাঙ্
র শিষ্য গদাধর এই প্রেম-সীমা |
आर कि कहिब प्रेमनिधिर महिमायाङ्
र शिष्य गदाधर एइ प्रेम-सीमा |
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| अनुवाद |
| प्रेमनिधि की महिमा के बारे में मैं और क्या कहूँ? उनके प्रेम की सीमा इसी बात से समझ में आती है कि उनके गदाधर पंडित जैसे शिष्य थे। |
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| What more can I say about the greatness of Premanidhi? The extent of his love is evident from the fact that he had a disciple like Gadadhara Pandit. |
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