श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.10.7 
সন্তোষে বলেন প্রভু, “কহত’ আচার্য!
কোথা হৈতে আইলা, করিযা কোন্ কার্য?”
सन्तोषे बलेन प्रभु, “कहत’ आचार्य!
कोथा हैते आइला, करिया कोन् कार्य?”
 
 
अनुवाद
संतुष्ट होकर भगवान ने पूछा, "हे आचार्य, मुझे बताइए, आप कहाँ से आए हैं? आप क्या कर रहे थे?"
 
Satisfied, the Lord asked, "O Acharya, tell me, where have you come from? What were you doing?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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