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श्लोक 3.10.54  |
একেশ্বর দামোদর-স্বরূপ-সṁহতি
প্রভু সে আনন্দে পডে, না জানেন কতি |
एकेश्वर दामोदर-स्वरूप-सꣳहति
प्रभु से आनन्दे पडे, ना जानेन कति |
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| अनुवाद |
| भगवान दामोदर स्वरूप की संगति में ऐसे आनंदित होते थे कि उन्हें पता ही नहीं चलता था कि वे कहाँ हैं। |
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| The Lord was so delighted in the company of Damodara Swarupa that he did not know where he was. |
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