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श्लोक 3.10.44  |
অলক্ষিত-রূপ—কেহো চিনিতে না পারে
কপটীর রূপে যেন বুলেন নগরে |
अलक्षित-रूप—केहो चिनिते ना पारे
कपटीर रूपे येन बुलेन नगरे |
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| अनुवाद |
| स्वरूप दामोदर गुप्त रूप में नगर में घूमते रहे ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। |
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| Swarup Damodar kept roaming around the city secretly so that no one could recognize him. |
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