श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.10.20 
শুনিঞা হাসেন সর্ব বৈষ্ণব-মণ্ডল
’হরি’ বলি’ উঠিল মঙ্গল-কোলাহল
शुनिञा हासेन सर्व वैष्णव-मण्डल
’हरि’ बलि’ उठिल मङ्गल-कोलाहल
 
 
अनुवाद
यह वार्तालाप सुनकर सभी वैष्णव मुस्कुराये और “हरि! हरि!” कहकर मंगलमय कोलाहल मचाया।
 
Hearing this conversation, all the Vaishnavas smiled and created a joyful uproar, shouting, "Hari! Hari!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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