श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  3.10.169 
গালে বাজিযাছে যত অঙ্গুলের অঙ্গুরি
ভাল-মতে উত্তরো করিতে নাহি পারি
गाले बाजियाछे यत अङ्गुलेर अङ्गुरि
भाल-मते उत्तरो करिते नाहि पारि
 
 
अनुवाद
"मेरे गालों पर उनकी उँगलियों के निशान देखो। मैं उन्हें शांत नहीं कर पाया।"
 
"Look at the marks of his fingers on my cheeks. I couldn't calm him down."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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