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श्लोक 3.10.161  |
“সকালে আইস জগন্নাথ-দরশনে
আজি শযা হৈতে নাহি উঠে কি কারণে?” |
“सकाले आइस जगन्नाथ-दरशने
आजि शया हैते नाहि उठे कि कारणे?” |
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| अनुवाद |
| "हर सुबह तुम मेरे साथ जगन्नाथ के दर्शन करने आते हो। आज तुम अभी तक क्यों नहीं उठे?" |
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| "Every morning you come with me to visit Jagannath. Why haven't you woken up yet today?" |
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