| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 3: अंत्य-खण्ड » अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा » श्लोक 109 |
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| | | | श्लोक 3.10.109  | বিদ্যানিধি বলে,—“ভাল, করুক ঈশ্বরে
ঈশ্বরের যে কর্ম, সেবকে কেনে করে | विद्यानिधि बले,—“भाल, करुक ईश्वरे
ईश्वरेर ये कर्म, सेवके केने करे | | | | | | अनुवाद | | पुण्डरीक विद्यानिधि ने कहा, "भगवान् अपनी इच्छानुसार कार्य करते हैं, किन्तु सेवक भगवान् के कार्यों का अनुकरण क्यों करते हैं? | | | | Pundarika Vidyanidhi said, "The Lord acts according to His will, but why do the servants imitate the Lord's actions? | | ✨ ai-generated | | |
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