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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
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श्लोक 105
श्लोक
3.10.105
এ দেশে ত’ শ্রুতি-স্মৃতি-সকল প্রচুরে
তবে কেনে বিনা ধৌতে মণ্ড-বস্ত্র পরে?”
ए देशे त’ श्रुति-स्मृति-सकल प्रचुरे
तबे केने विना धौते मण्ड-वस्त्र परे?”
अनुवाद
"इस स्थान पर श्रुतियों और स्मृतियों को व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है, तो फिर धोने से पहले कलफ लगे कपड़े को क्यों चढ़ाया जाता है?"
"The Shrutis and Smritis are widely accepted at this place, so why is starched cloth offered before washing?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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