श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  3.1.80 
“কৃষ্ণ রে প্রভু রে আরে কৃষ্ণ মোর বাপ!”
বলিযা রোদন করে সর্ব-জীব-নাথ
“कृष्ण रे प्रभु रे आरे कृष्ण मोर बाप!”
बलिया रोदन करे सर्व-जीव-नाथ
 
 
अनुवाद
सभी जीवों के स्वामी ने आँसू बहाते हुए पुकारा, "हे कृष्ण! हे प्रभु! हे मेरे प्रिय कृष्ण!"
 
The Lord of all living beings cried out in tears, "O Krishna! O Lord! O my beloved Krishna!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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