श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.1.79 
নিজ প্রেম-রসে বৈকুণ্ঠের অধীশ্বর
প্রান্তরে রোদন করে করিঽ উচ্চৈঃ-স্বর
निज प्रेम-रसे वैकुण्ठेर अधीश्वर
प्रान्तरे रोदन करे करिऽ उच्चैः-स्वर
 
 
अनुवाद
उस खाली भूखंड में वैकुण्ठ के भगवान अपने परमानंद में मग्न होकर जोर-जोर से रो रहे थे।
 
In that empty plot of land, the Lord of Vaikuntha was weeping loudly, immersed in his bliss.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)