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श्लोक 3.1.74  |
দিন-অবশেষে প্রভু এক ধন্য গ্রামে
রহিলেন পুণ্যবন্ত-ব্রাহ্মণ-আশ্রমে |
दिन-अवशेषे प्रभु एक धन्य ग्रामे
रहिलेन पुण्यवन्त-ब्राह्मण-आश्रमे |
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| अनुवाद |
| दिन के अंत में भगवान एक भाग्यशाली गांव में आये और एक पुण्यात्मा ब्राह्मण के घर में ठहरे। |
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| At the end of the day the Lord came to a fortunate village and stayed in the house of a pious Brahmin. |
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