श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  3.1.72 
শ্রী-কৃষ্ণ-চৈতন্য-নামে বিমুখ যে জন
নিশ্চয জানিহ সেই পাপী ভূত-গণ
श्री-कृष्ण-चैतन्य-नामे विमुख ये जन
निश्चय जानिह सेइ पापी भूत-गण
 
 
अनुवाद
यह निश्चित जान लो कि जो कोई भी श्री कृष्ण चैतन्य का नाम जपने से विमुख है, वह पापी, भूत-प्रेत से ग्रस्त व्यक्ति है।
 
Know this for sure that anyone who is averse to chanting the name of Sri Krishna Chaitanya is a sinner, a person possessed by ghosts and spirits.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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