श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  3.1.64 
প্রভু বলে,—“বক্রেশ্বর আছেন যে বনে
তথাই যাইমু মুঞি থাকিমু নির্জনে”
प्रभु बले,—“वक्रेश्वर आछेन ये वने
तथाइ याइमु मुञि थाकिमु निर्जने”
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "मैं उस वन में जाऊँगा जहाँ वक्रेश्वर विराजमान हैं और वहाँ एकांत में रहूँगा।"
 
The Lord said, "I will go to the forest where Vakresvara resides and live there in solitude."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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