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श्लोक 3.1.62  |
হুঙ্কার গর্জন করে বৈকুণ্ঠের রায
জগতের চিত্ত-বৃত্তি শুনিঽ শোধ পায |
हुङ्कार गर्जन करे वैकुण्ठेर राय
जगतेर चित्त-वृत्ति शुनिऽ शोध पाय |
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| अनुवाद |
| वैकुण्ठ के स्वामी की गर्जना सुनकर संसार के सभी लोगों के हृदय शुद्ध हो गए। |
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| Hearing the roar of the Lord of Vaikuntha, the hearts of all the people of the world became pure. |
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