श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.1.42 
এই মত বিরহে সকল ভক্ত-গণ
সবার হৈল বড চিত্ত উচাটন
एइ मत विरहे सकल भक्त-गण
सबार हैल बड चित्त उचाटन
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सभी भक्तों के हृदय विरह की भावना से व्याकुल हो उठे।
 
In this way the hearts of all the devotees became restless with the feeling of separation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)