vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना
»
श्लोक 40
श्लोक
3.1.40
অদ্বৈত বলযে,—“আর কি কার্য জীবনে
সে-হেন ঠাকুর মোর ছাডিল যখনে
अद्वैत बलये,—“आर कि कार्य जीवने
से-हेन ठाकुर मोर छाडिल यखने
अनुवाद
अद्वैत प्रभु ने कहा, "जब ऐसे भगवान मुझे छोड़कर चले गए तो इस जीवन का क्या उपयोग है?
Advaita Prabhu said, “What is the use of this life when such a Lord has left me?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×