श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.1.40 
অদ্বৈত বলযে,—“আর কি কার্য জীবনে
সে-হেন ঠাকুর মোর ছাডিল যখনে
अद्वैत बलये,—“आर कि कार्य जीवने
से-हेन ठाकुर मोर छाडिल यखने
 
 
अनुवाद
अद्वैत प्रभु ने कहा, "जब ऐसे भगवान मुझे छोड़कर चले गए तो इस जीवन का क्या उपयोग है?
 
Advaita Prabhu said, “What is the use of this life when such a Lord has left me?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)