श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 283
 
 
श्लोक  3.1.283 
বৃন্দাবন-মধ্যে যেন গোপ-গণ-সঙ্গে
রাম-কৃষ্ণ ভোজন করেন সেই রঙ্গে
वृन्दावन-मध्ये येन गोप-गण-सङ्गे
राम-कृष्ण भोजन करेन सेइ रङ्गे
 
 
अनुवाद
ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कृष्ण और बलराम अपने ग्वाल मित्रों के बीच वृन्दावन में आनन्दपूर्वक भोजन कर रहे हों।
 
It seemed as if Krishna and Balarama were happily eating in Vrindavan among their cowherd friends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)