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श्लोक 3.1.273  |
কি আনন্দ হৈল সে অদ্বৈতের ঘরে
যে রস হৈল পূর্বে নদীযা নগরে |
कि आनन्द हैल से अद्वैतेर घरे
ये रस हैल पूर्वे नदीया नगरे |
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| अनुवाद |
| अद्वैत का घर उस परमानंद से भर गया जिसका आनंद पहले नादिया शहर में लिया जाता था। |
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| Advaita's house was filled with the ecstasy that was earlier enjoyed in the city of Nadia. |
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