श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.1.24 
গুরু বলে,—“আমিহ চলিব তোমাঽ সঙ্গে
থাকিব তোমার সাথে সঙ্কীর্তন-রঙ্গে”
गुरु बले,—“आमिह चलिब तोमाऽ सङ्गे
थाकिब तोमार साथे सङ्कीर्तन-रङ्गे”
 
 
अनुवाद
उनके गुरु ने उत्तर दिया, "मैं आपके साथ चलूँगा। मैं आपके साथ रहूँगा और संकीर्तन के आनंद का आनंद लूँगा।"
 
His guru replied, "I will go with you. I will stay with you and enjoy the bliss of sankirtan."
तात्पर्य
संकीर्तन का एक अन्य पाठ कृष्ण-कथा है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)