श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  3.1.154 
“বাপ বাপ,” বলি আই হৈলা মূর্চ্ছিত
না জানিযে কে বা পডযে কোন্ ভিত
“बाप बाप,” बलि आइ हैला मूर्च्छित
ना जानिये के वा पडये कोन् भित
 
 
अनुवाद
माता शची बेहोश हो गईं और बार-बार पुकारने लगीं, "मेरा बेटा! मेरा बेटा!" कोई नहीं जानता था कि कौन किस दिशा में गिरा।
 
Mother Shachi fainted and cried out repeatedly, "My son! My son!" No one knew which direction the person fell.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)