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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना
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श्लोक 127
श्लोक
3.1.127
প্রভু বলে,—“শুন নিত্যানন্দ মহামতি!
সত্বরে চলহ তুমি নবদ্বীপ-প্রতি
प्रभु बले,—“शुन नित्यानन्द महामति!
सत्वरे चलह तुमि नवद्वीप-प्रति
अनुवाद
भगवान ने कहा, "हे उदार नित्यानंद! सुनो! शीघ्र ही नवद्वीप जाओ।"
The Lord said, "O generous Nityananda! Listen! Go to Navadvipa quickly."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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