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श्लोक 3.1.124  |
নিত্যানন্দ-সṁহতি সে নিশা সেই-গ্রামে
আছিলেন কোন পুণ্যবন্তের আশ্রমে |
नित्यानन्द-सꣳहति से निशा सेइ-ग्रामे
आछिलेन कोन पुण्यवन्तेर आश्रमे |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार भगवान् और नित्यानन्द उस रात उस गाँव में एक पुण्यात्मा के घर ठहरे। |
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| Thus the Lord and Nityananda stayed that night at the house of a saintly person in that village. |
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