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श्लोक 3.1.116  |
সকৃত্ তোমার নাম করিলে শ্রবণ
তার বিষ্ণু-ভক্তি হয, কি পুনঃ ভক্ষণ |
सकृत् तोमार नाम करिले श्रवण
तार विष्णु-भक्ति हय, कि पुनः भक्षण |
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| अनुवाद |
| “आपका नाम एक बार सुनने मात्र से ही मनुष्य भगवान विष्णु की भक्ति प्राप्त कर लेता है, और आपका जल पीने की तो बात ही क्या है। |
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| “Just by hearing your name once, a person attains devotion to Lord Vishnu, and what to say of drinking your water. |
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