भक्तिपूर्ण शुद्ध भक्तों के उपदेश देने के दयालु तरीके को देखकर, आजकल कई लोग कहते हैं कि घर में अकेले में प्रभु की पूजा करना बेहतर होता है। उनका कहना है कि घमंड और अहंकार जैसी विभिन्न बाधाएं उन लोगों पर हमला करती हैं जो कीर्तन के माध्यम से उपदेश देते हैं। परंतु इस उदाहरण में, यदि देवानंद पंडित जैसा कोई व्यक्ति भक्ति सेवा के बारे में अज्ञानी रहता है और भक्ति सेवा की महिमा का प्रचार नहीं करता है, तो वह अपराध करता है। यही इस लीला का उद्देश्य है। इस दुनिया की हर गतिविधि में भक्ति सेवा की कमी देखी जाती है, परंतु यदि कोई उस कमी को दूर करने के लिए प्रभु का गौरव नहीं करता है, तो वह अपराध से छुआ हुआ होता है।
