श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.9.81 
নানা-বিধ প্রচুর সন্দেশ দেই আনিঽ
শ্রী-হস্তে লৈযা প্রভু খাযেন আপনি
नाना-विध प्रचुर सन्देश देइ आनिऽ
श्री-हस्ते लैया प्रभु खायेन आपनि
 
 
अनुवाद
वे बहुत सारी मिठाइयाँ लाए, जिन्हें भगवान ने अपने हाथों में लिया और खाया।
 
They brought a lot of sweets, which the Lord took in his hands and ate.
तात्पर्य
सन्देश शब्द इस प्रकार समझाया गया है, कि वर्तमान काल में दही से बना एक ख़ास प्रकार का मीठा पदार्थ सन्देश कहलाता है। परंतु यहां पर सन्देश शब्द से कई प्रकार की मिठाइयों को सूचित किया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)