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श्लोक 2.9.63  |
সর্ব মাযা ঘুচাইযা প্রভু গৌরচন্দ্র
শ্রী-চরণ দিলেন, পূজযে ভক্ত-বৃন্দ |
सर्व माया घुचाइया प्रभु गौरचन्द्र
श्री-चरण दिलेन, पूजये भक्त-वृन्द |
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| अनुवाद |
| भगवान गौरचन्द्र ने अनायास ही अपने चरणकमल फैला दिये, जिनकी सभी भक्तों ने पूजा की। |
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| Lord Gaurachandra spontaneously spread out His lotus feet, which were worshipped by all the devotees. |
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