श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.9.31 
গৌরাঙ্গের ভক্ত সব মহা-মন্ত্র-বিত্
মন্ত্র পডিঽ জল ঢালে হৈঽ হরষিত
गौराङ्गेर भक्त सब महा-मन्त्र-वित्
मन्त्र पडिऽ जल ढाले हैऽ हरषित
 
 
अनुवाद
गौरांग भक्त मंत्रोच्चार में निपुण थे। मंत्रोच्चार करते हुए, वे प्रसन्नतापूर्वक भगवान पर जल डालते थे।
 
Gauranga devotees were adept at chanting mantras. While chanting, they would happily pour water on the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)