श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.9.27 
শেষে শ্রী-কর্পূর চতুঃসম-আদি
দিযাসজ্জ করিলেন সবে প্রেম-যুক্ত হৈযা
शेषे श्री-कर्पूर चतुःसम-आदि
दियासज्ज करिलेन सबे प्रेम-युक्त हैया
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने खुशी-खुशी जल में कपूर और चार अन्य सामग्रियां मिलाकर अभिषेक की तैयारी की।
 
After this, he happily prepared for the Abhishek by mixing camphor and four other ingredients in water.
तात्पर्य
हरी-भक्ति-विलास (6.115) गरुड़ पुराण का उद्धरण देते हुए कहता है: "चतुःसमा में दो भाग कस्तूरी, चार भाग चंदन, तीन भाग कुंकुम और एक भाग कपूर होते हैं।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)