অহঙ্কার-দ্রোহ-মাত্র বিষযেতে আছে
অধঃপাত-ফল তার না জানযে পাছে
अहङ्कार-द्रोह-मात्र विषयेते आछे
अधःपात-फल तार ना जानये पाछे
अनुवाद
जो व्यक्ति झूठे अभिमान से भरा है और जीवन के लक्ष्य से ईर्ष्या करता है, वह अनिश्चित भविष्य की ओर गिरता है।
A person who is full of false pride and jealous of the goal of life falls towards an uncertain future.
तात्पर्य
प्रत्येक जीवित इकाई का एकमात्र लक्ष्य भगवान कृष्ण के चरण कमलों की सेवा करना है। जो लोग भौतिक सुख के लिए गहन इच्छा रखते हैं जो कृष्ण से सम्बंधित नहीं है वे झूठे गर्व के नियंत्रण में आ जाते हैं और भक्ति सेवा से ईर्ष्या करने लगते हैं। जिन लोगों का हृदय भौतिक आनंद के लिए लालची है, वे अंततः अपमानित होते हैं। इसलिए ठाकुर नरोट्टम ने कहा है कि कर्म-कांड, जिसके द्वारा व्यक्ति अपनी गतिविधियों के फल का आनंद लेता है, और ज्ञान-कांड, जिसके द्वारा व्यक्ति अपनी गतिविधियों के फल का त्याग करता है, दोनों ही जहर के बर्तन हैं। उन दो जहर के बर्तनों को पीने की तीव्र प्यास रखने वालों का जीवन निश्चित रूप से बर्बाद हो जाएगा। कर्म-कांड में लगे लोग अपनी इंद्रियों को संतुष्ट करने की इच्छा से भौतिक वस्तुओं के पीछे दौड़ते हैं और इस तरह जन्म और मृत्यु के चक्र में गिर जाते हैं। वे स्वर्ण पिंजरों के भीतर कैद रहते हुए अस्थायी इंद्रिय संतुष्टि में संलग्न होकर कृष्ण की सेवा के प्रति अपनी घृणा बढ़ाते हैं। यह शरीर को आत्म के रूप में समझने के रूप में जीवित संस्थाओं का पतन है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥