श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 229
 
 
श्लोक  2.9.229 
শ্রীধর বলযে,—“মুঞি কিছুই না চাঙ
হেন কর প্রভু যেন তোর নাম গাঙ”
श्रीधर बलये,—“मुञि किछुइ ना चाङ
हेन कर प्रभु येन तोर नाम गाङ”
 
 
अनुवाद
श्रीधर ने उत्तर दिया, "मुझे कुछ नहीं चाहिए। हे प्रभु, ऐसी व्यवस्था कीजिए कि मैं आपके नामों का जप कर सकूँ।"
 
Sridhar replied, "I don't want anything. O Lord, please arrange for me to chant your names."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)