भगवान बोले, "हे श्रीधर, मेरे स्वरूप को देखो। आज मैं तुम्हें आठ सिद्धियाँ प्रदान करूँगा।"
The Lord said, "O Sridhar, look at my form. Today I will grant you eight siddhis."
तात्पर्य
अष्ट-सिद्धि वाक्यांश को श्रीमद् भागवतम् (11.15.4-5) में इस प्रकार समझाया गया है: "आठ प्राथमिक रहस्यमय सिद्धियों में, तीन जिससे कोई अपने शरीर को रूपांतरित करता है अनिमा है, जो सबसे छोटे से भी छोटा बन जाता है; महिमा, जो सबसे महान से महान बन जाता है; और लघिमा, जो सबसे हल्के से भी हल्का हो जाता है। प्राप्ति की सिद्धि के द्वारा कोई भी जो कुछ भी चाहता है उसे प्राप्त कर लेता है और प्रकाम्य-सिद्धि के द्वारा कोई भी इस संसार या अगले संसार में किसी भी आनंददायक वस्तु का अनुभव करता है। ईशिता-सिद्धि के द्वारा कोई माया की उपशक्तियों को नियंत्रित कर सकता है और वशिता-सिद्धि नामक नियंत्रण शक्ति के द्वारा कोई प्रकृति के तीनो गुणों से अप्रभावित रहता है। जिसने कामवासायित-सिद्धि प्राप्त कर ली हो वह कहीं से भी, संभावित उच्चतम सीमा तक कुछ भी प्राप्त कर सकता है। मेरे प्रिय सौम्य उद्धव, इस संसार में इन आठ रहस्यमय सिद्धियों को स्वाभाविक रूप से विद्यमान और अतुलनीय माना गया है।"