श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 182
 
 
श्लोक  2.9.182 
শ্রীধর বলেন,—“মুঞি হারিলুঙ্ তোমারে
কডি বিনু কিছু দিব, ক্ষমা কর মোরে
श्रीधर बलेन,—“मुञि हारिलुङ् तोमारे
कडि विनु किछु दिब, क्षमा कर मोरे
 
 
अनुवाद
श्रीधर बोले, "मैं हार गया हूँ। कृपया मुझे अकेला छोड़ दीजिए। मैं आपको कुछ मुफ़्त दूँगा।"
 
Sridhar said, "I have lost. Please leave me alone. I will give you something for free."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)